Wednesday, December 28, 2011

माँ ..हैं ..न...इसीलिए ...तड़प रहें है ...बच्चों पर क्यूँ निकला .....सारा गुस्सा .....बेटे की पिटाई करने के बाद कितनी देर तक कमरा बंद कर..... योग करने के बहाने रोते रहे.......! मारा भी क्यों..... क्योंकी ...आजकल ठीक से खाना नहीं खा रहा है ...बस हर बार कोई न कोई बहाना  निकाल लेता है ....कभी कहता है गोभी पसंद नहीं ...भिन्डी ...खाना नहीं ....मेथी कड़वी लगती है ...सेम  में कुछ धागा.... धागा सा मुंह में आता है ...बैगन  का टेस्ट बहुत बेकार लगता है .......अभी सोयाबीन  की सब्जी बनाई तो रो- रो कर खा रहा था ...बस गुस्सा आयी तो  एक थप्पड़ लगा दिया ...पर ऐसा लगा जैसे खुद का दिल जख्मी कर लिया हो ...! रोज टिफिन  में परांठा छोड़ देता है ....तकलीफ इस बात की  है कि रोज सुबह जल्दी जल्दी.... भाग भाग कर .... साढ़े चार बजे से सीधे कढाई..में ही गिरते हैं ...उठकर बच्चों के लिए टिफिन  तैयार करतें है और खुद  साढ़े छः बजे घर छोड़ देते हैं ...और बच्चे ...ठीक से खाना भी नहीं खाते ...! नाश्ता बना कर टेबल पर रख जातें है ....और गेट से निकलते-- निकलते दस... दस बार चिल्ला  कर कह कर जातें है ...के बच्चों नाश्ता करके जाना ...पर जब तीन बजे घर लौट कर आतें है तो मम्मीजी  बतातीं हैं कि दोनों तो बस दूध  पीकर स्कूल चले गए !....मन रोने रोने जैसा हो जाता है ....दुःख इस बात का होता है ..कि जिस दिन मेरी छुटटी होती है .. बच्चे नाश्ता भी करके जातें है ...और बहुत खुश दिखतें है ......पर मेरे न होने पर कोई नहीं होता जो इन्हें हाथ में दूध  का ग्लास  दे ..और साथ में परांठा  ...गोल करके हाथ में पकड़ा सके .....
मन बुझता जाता है ....जो सुख इन्हें मिलना चाहिए वो हम नहीं दे पा रहें है ...पर इसकी भरपाई करने की कोशिश ...स्कूल से आने के बाद ...साथ में ..सामने बिठा कर खाना खिला कर पूरी करते हैं ...!सोचतें है ...अगर हमें कुछ हो गया तो मेरे बच्चों को कौन देखेगा ...कौन उनका ख्याल रखेगा .....ये सच है ...पिता कभी माँ के प्यार की भरपाई नहीं कर सकेगा ....!

1 Comments:

At February 1, 2012 at 4:56 PM , Blogger Ashok Jairath said...

माँ तुझे नमन

मन होता है फिर से मै बन जाऊं बालक
तेरा ही माँ फिर से मै बन जाऊ बालक
आँचल का तेरे मैं सारा प्यार चुरा लू
तुझको केवल तुझको ही मैं शीश नवाओं
ईश्वर को भी तभी यदि वो जाए तुझ सा

इतना, बस इतना ही मुझको आज बता दे
तू ही बस, इक बस तू मुझको , सदा मिलेगी
मुझको मेरी ईश्वर जैसी माता बन कर

आदित्य

 

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